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Global • 2026-11-02, 08:29 GMT • ~1 min read
अध्ययन के अनुसार मानव चयापचय से ही सालाना 2 अरब टन CO2 निकलता है
मुख्य बातें
- एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार केवल मानव शरीर की गतिविधि और सांस लेने से सालाना लगभग 2 अरब मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है। यह आंकड़ा गाड़ियों, कारखानों और बिजली संयंत्रों के उत्सर्जन से अलग है, और यह बताता है कि मानव गतिविधि का पैमाना कितना बड़ा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह निष्कर्ष मानव गतिविधि के पैमाने को समझने में मदद देता है, हालांकि सांस लेना प्राकृतिक कार्बन चक्र का हिस्सा है, जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण नहीं।
एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार केवल मानव शरीर की गतिविधि और सांस लेने से सालाना लगभग 2 अरब मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है। यह आंकड़ा गाड़ियों, कारखानों और बिजली संयंत्रों के उत्सर्जन से अलग है, और यह बताता है कि मानव गतिविधि का पैमाना कितना बड़ा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह निष्कर्ष मानव गतिविधि के पैमाने को समझने में मदद देता है, हालांकि सांस लेना प्राकृतिक कार्बन चक्र का हिस्सा है, जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण नहीं।
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